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नेह हमारा निर्मल निर्झर – Kavita – By Sumit Vijayvargiya (Kavitalay Member)

नेह हमारा निर्मल निर्झर, अविरल और अभिराम प्रिये, बीत गए हो बरस भले ही, अधरों पर है नाम प्रिये। बेशक याद तुम्हें भी होगा, वो आंखों से बतियाना, फूल गुलाबों के दे देकर, प्रणय दिलों तक पहुँचाना, उन फूलों से महक रहे है, मेरे सुबह और शाम प्रिये। बीत गए हो बरस भले ही, अधरों […]

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तो क्या हुआ – Kavita – By Ajeet Rana (Kavitalay Member)

धीरज धरो हिम्मत करो दिन हैं विकट, तो क्या हुआ| साहस अदम्य, रग में तेरे; दुःख है निकट ,तो क्या हुआ|| विपदाएं आई कई झेली कई तू याद कर , तब भी अचल और अडिग था ढून्ढ लेता था, राहें नई आज फिर क्यूँ टूटता ? संकट नया तो क्या हुआ|| तू हौसला कर होकर […]