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नेह हमारा निर्मल निर्झर – Kavita – By Sumit Vijayvargiya (Kavitalay Member)

नेह हमारा निर्मल निर्झर, अविरल और अभिराम प्रिये, बीत गए हो बरस भले ही, अधरों पर है नाम प्रिये। बेशक याद तुम्हें भी होगा, वो आंखों से बतियाना, फूल गुलाबों के दे देकर, प्रणय दिलों तक पहुँचाना, उन फूलों से महक रहे है, मेरे सुबह और शाम प्रिये। बीत गए हो बरस भले ही, अधरों […]

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जीवन भर घनघोर घटाएं,पग-पग पर संत्रास मिला – Kavita – By Sumit Vijayvargiya (Kavitalay Member)

जीवन भर घनघोर घटाएं, पग-पग पर संत्रास मिला। निज गौरव के अन्वेषण में, सर्वलोक उपहास मिला।। उमर हाथ से गई फिसल अब, आखों से आशा रूठी, तथाकथित गुरुता, गरिमा की माल भाल से जा छूटी, घोर तमिस्रा की कारा में, विधि है प्रबल प्रमाण मिला। क्षुद्र ग्रहों को मान मिला और चन्दा को अवमान मिला।। […]