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क्या से क्या करवा रही थी – Kavita – By Purab “Nirmey” (Kavitalay Member)

प्रतिध्वनि के मोल में ,तुम हो विदित संसार जैसे न्याय में निर्दोष से ,तब चीख के पर्याय कैसे ?? एक निराशा इंगितों में ,नाद करके जा रही थी शक्ति के संकल्प पथ पर ,पीर वो ही गा रही थी| वर्जना सी कामनायें ,वो ही जो थी लूप हममें युगऋचा युगबोध को ,युगधर्म फिर समझा रही […]