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नेह हमारा निर्मल निर्झर – Kavita – By Sumit Vijayvargiya (Kavitalay Member)

नेह हमारा निर्मल निर्झर, अविरल और अभिराम प्रिये, बीत गए हो बरस भले ही, अधरों पर है नाम प्रिये। बेशक याद तुम्हें भी होगा, वो आंखों से बतियाना, फूल गुलाबों के दे देकर, प्रणय दिलों तक पहुँचाना, उन फूलों से महक रहे है, मेरे सुबह और शाम प्रिये। बीत गए हो बरस भले ही, अधरों […]