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रे बदरा लेकर आ सन्देश – Prem Geet – By Pt Utkarsh Chaturvedi (Kavitalay Member)

प्रेम गीत (श्रृंगार रस) आँखें क्यों सटती नहीं लगतें पलक ना रात। क्यों साजन कि चिंता लगी, जानें क्या है बात! वैसे तो साजन हैं हमारें, एक लाखों में एक रे बदरा लेकर आ सन्देश, रे जा जा लेकर आ संदेश..। कर्म बनें तो सब बने खेत बारी खलिहान देख ज़रा तू मुझे बता दें, […]

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Kavita – तुम कहते मै सुनती – By Soni Dimri (Kavitalay Member)

बीते जमाने थे वो जब इश्क किया करते थे मै चुप तुमको देखती और तुम कहते मैं सुनती। रात चांदनी वो, हवाएं ठंडी स्वप्न सागर में खो जाते लहरों की भांति तट पर आते कितना पाक प्रेम था वो जब तुम कहते मैं सुनती। सर्द हवा ना सर्द लगे ग्रीष्म ऋतु जब बसंत लगे इन्हीं […]

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Kavita – आया सावन झूम के – By Anju Vaish (Kavitalay Member)

आया सावन देखो सखियों ये मन को हर्षाए, डाल- डाल पर कोयल बोले मनवा नाचे गए। मनवा हिलोरे खाता सबका बागों के झूलों पर , मोर नाचता देखो सखियों मोहन की वंशी पर। सज-धज तीज मनाती देखो गौरा को मनाये, और शिव जी से अचल सौभाग्य का वर पाये। झूम रही है डाली – डाली […]

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नई बात हो – Kavita -By Sumit Vijayvargiya (Kavitalay Member)

प्रेम अक्सर रहा है विरह और व्यथा,  इक भरोसा मिले तो नई बात हो। चंद लम्हो के किस्से बहुत आम है, जो जनम भर चलो, तो नई बात हो। तुमसे चेहरे जहां में हजारों हसीं,  फिर भी मन बावरे ने तुम्हें ही चुना, ज़ख्म तो दिल को मिलते रहे अब तलक,  गर जो मरहम बनो […]