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किसी का खयाल तुम्हारे जेहन में जब ठहरने लगे – Poem – By Tushar Srivastava (Kavitalay Member)

किसी का खयाल तुम्हारे जेहन में जब ठहरने लगे कहो ये दिल से उसी दिन से वो सम्भलने लगे। वो एक शख्स जो सामने हो तो खुश होऊँ मैं अश्क आ जाएं गर सपनों में भी बिछड़ने लगे। अभी देखा ही कहाँ उसका हुनर तुमने ऐ लोगों वो जरा जुल्फें गिरा दे तो शाम ढलने […]

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कामकाजी औरतें – Kavita – By Priyanka Katare ‘प्रिराज’ (Kavitalay Member)

कामकाजी औरतेंजब भी निकलतीं हैं,घर  से  बाहररोटी कमाने को,वो सिर्फ रोटी हीनहीं कमातीं,कमातीं हैं साथ मेंथोड़ा सा अपमान,थोड़ी लालची निगाहें,और खोती हैं जब कभी,अपना स्वाभिमान भी ।आँका जाता हैउनका पहनावा,चाल- चलन औरहंसना बोलना भी।समान प्रतिभाहोते हुए भी,कहाँ मिल पाती हैकोई भी समानता,कामकाजी औरतों को!और ये कामकाजी औरतेंयूँही रोज खुद को,खरचती रहती हैं,बस रोटी कमाने में।– […]