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नेह हमारा निर्मल निर्झर – Kavita – By Sumit Vijayvargiya (Kavitalay Member)

नेह हमारा निर्मल निर्झर, अविरल और अभिराम प्रिये, बीत गए हो बरस भले ही, अधरों पर है नाम प्रिये। बेशक याद तुम्हें भी होगा, वो आंखों से बतियाना, फूल गुलाबों के दे देकर, प्रणय दिलों तक पहुँचाना, उन फूलों से महक रहे है, मेरे सुबह और शाम प्रिये। बीत गए हो बरस भले ही, अधरों […]

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Kavita – तुम कहते मै सुनती – By Soni Dimri (Kavitalay Member)

बीते जमाने थे वो जब इश्क किया करते थे मै चुप तुमको देखती और तुम कहते मैं सुनती। रात चांदनी वो, हवाएं ठंडी स्वप्न सागर में खो जाते लहरों की भांति तट पर आते कितना पाक प्रेम था वो जब तुम कहते मैं सुनती। सर्द हवा ना सर्द लगे ग्रीष्म ऋतु जब बसंत लगे इन्हीं […]

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अगर तुम मिलने आ जाओ – Kavita – Sumit Vijayvargiya (Kavitalay Member)

गिला सारा निकल जाएं,  अगर तुम मिलने आ जाओ, ये दिल फिर से बहक जाएं  अगर तुम मिलने आ जाओ। जहाँ में सब हमारे है , अगर रूठे हो तुम हमसे, बगावत फिर से हो जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ। गुलिस्तां फिर महक जाएं,  अगर तुम मिलने आ जाओ, दफ़न दरिया मचल जाएं,  अगर […]