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Kavita – जुदाई – By Inder (Kavitalay Member)

चार दिनों का ये इश्क़  हमे शजरा लगता है कुछ तो तेरी जिंदगी का  मुझसे गुज़रा गुज़रा लगता है चाहते तुझ से जुड़ी है पैहम फिर भी जाने क्यों जाना इस दुनिया में हमसे तू बिछड़ा बिछड़ा लगता ह ै तुझे मिला गया अब क्या नया नया कोई कल परसों से तू मुझसे कुछ उखडा […]

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अगर तुम मिलने आ जाओ – Kavita – Sumit Vijayvargiya (Kavitalay Member)

गिला सारा निकल जाएं,  अगर तुम मिलने आ जाओ, ये दिल फिर से बहक जाएं  अगर तुम मिलने आ जाओ। जहाँ में सब हमारे है , अगर रूठे हो तुम हमसे, बगावत फिर से हो जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ। गुलिस्तां फिर महक जाएं,  अगर तुम मिलने आ जाओ, दफ़न दरिया मचल जाएं,  अगर […]