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जीवन भर घनघोर घटाएं,पग-पग पर संत्रास मिला – Kavita – By Sumit Vijayvargiya (Kavitalay Member)

जीवन भर घनघोर घटाएं, पग-पग पर संत्रास मिला। निज गौरव के अन्वेषण में, सर्वलोक उपहास मिला।। उमर हाथ से गई फिसल अब, आखों से आशा रूठी, तथाकथित गुरुता, गरिमा की माल भाल से जा छूटी, घोर तमिस्रा की कारा में, विधि है प्रबल प्रमाण मिला। क्षुद्र ग्रहों को मान मिला और चन्दा को अवमान मिला।। […]

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क्या से क्या करवा रही थी – Kavita – By Purab “Nirmey” (Kavitalay Member)

प्रतिध्वनि के मोल में ,तुम हो विदित संसार जैसे न्याय में निर्दोष से ,तब चीख के पर्याय कैसे ?? एक निराशा इंगितों में ,नाद करके जा रही थी शक्ति के संकल्प पथ पर ,पीर वो ही गा रही थी| वर्जना सी कामनायें ,वो ही जो थी लूप हममें युगऋचा युगबोध को ,युगधर्म फिर समझा रही […]