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Ghazal Kavita Zaki Tariq

भरे तो कैसे परिंदा भरे उड़ान – Hindi Kavita by Zaki Tariq

 भरे तो कैसे परिंदा भरे उड़ान कोई  नहीं है तीर से ख़ाली यहाँ कमान कोई  थीं आज़माइशें जितनी तमाम मुझ पे हुईं  न बच के जाएगा अब मुझ से इम्तिहान कोई  ये तोता मैना के क़िस्से बहुत पुराने हैं  हमारे अहद की अब छेड़ो दास्तान कोई  नए ज़माने की ऎसी कुछ आँधियाँ उट्ठीं  रहा सफ़ीने […]

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Kavita – कवितालय – By Ajay Tangar (Kavitalay Member)

अनजाने से चेहरों को है  दोस्त बनाता कवितालय  पथ से भटके लोगों को है राह दिखाता कवितालय  कभी कृष्ण सा सारथी बनकर  ज्ञान बढ़ाता कवितालय  कभी विरह के अनुभव से है खूब रुलाता कवितालय  राजनीति से परे बैठकर सुख-दुख बतलाता कवितालय   कभी शाम हमराह बनके  प्यार सिखाता कवितालय कभी नशे में चूर स्वप्न को जमी […]

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उतारना है- Kavita – By Gaurav Pareek ‘फागवी’ (Kavitalay Member)

दिए तूने तोहफ़े में ज़ख्म,  तो एतराज कैसा,  थोड़ा सा कुरेदना है,  मलहम उतारना है।  ज़हर जो उतरा है,  तेरे जेहन में रफ़्ता रफ़्ता,  पीना है उसे बेखौफ,  तेरा वहम उतारना है। बुना गया है जिसे,  तबीयत से इर्द-गिर्द,  तिलिस्म ये तोड़ना है,  वो असर उतारना है।  कब तलक ढोता रहूँ,  जनाज़ा अपने कंधों पे,  […]