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मां – A poem by Bharmal Garg

जब नेह नयन के दर्पण में। जब पावन पुण्य समर्पण में।। जब मात-पिता का वंदन हो। जब गुरुवर का अभिनन्दन हो।। जब मां बसे हों कण कण में। जब पिता बसे हों तन-मन में।। परिवार का सार्थक है। निज मन का सुखद है।। करुणा का दीप है। ज्ञान का प्रतीक है।। जीवन का आधार है। […]

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जीवन भर घनघोर घटाएं,पग-पग पर संत्रास मिला – Kavita – By Sumit Vijayvargiya (Kavitalay Member)

जीवन भर घनघोर घटाएं, पग-पग पर संत्रास मिला। निज गौरव के अन्वेषण में, सर्वलोक उपहास मिला।। उमर हाथ से गई फिसल अब, आखों से आशा रूठी, तथाकथित गुरुता, गरिमा की माल भाल से जा छूटी, घोर तमिस्रा की कारा में, विधि है प्रबल प्रमाण मिला। क्षुद्र ग्रहों को मान मिला और चन्दा को अवमान मिला।। […]

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क्या से क्या करवा रही थी – Kavita – By Purab “Nirmey” (Kavitalay Member)

प्रतिध्वनि के मोल में ,तुम हो विदित संसार जैसे न्याय में निर्दोष से ,तब चीख के पर्याय कैसे ?? एक निराशा इंगितों में ,नाद करके जा रही थी शक्ति के संकल्प पथ पर ,पीर वो ही गा रही थी| वर्जना सी कामनायें ,वो ही जो थी लूप हममें युगऋचा युगबोध को ,युगधर्म फिर समझा रही […]

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देश आज पूछता सवाल है – Kavita – By Anil Mishra Prahari (Kavitalay Member)

देश आज पूछता सवाल है। कहाँ गयी चमक- दमक प्रखर कुँअर-कटार की, प्रवाह,  वो    रवानियाँ उछाल सिन्धु – धार की। जाति, धर्म, नस्ल का बवाल है। देश  आज  पूछता  सवाल  है।  गीत  वो   रवीन्द्र   के कहाँ गये भगत, तिलक?  सुभाष – सा न तप कहीं  नजर गयी  जहाँ  तलक। स्वार्थ तज सके न हम मलाल […]

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इश्क करना नहीं – Kavita – By Dhirendra Panchal (Kavitalay Member)

इश्क़ पर तुम किताबें लिखे जा रहे हो मशवरा है मेरा इश्क करना नहीं। दर्द कागज पे अपने लिखे जा रहे हो मशवरा है मेरा दर्द कहना नहीं। मुस्कुराने की उनकी अदब देखिए तो देखकर यूँ ही खुद से फिसलना नहीं। लाख कह लें तुम्हें , तुम हो मेरे लिए मुस्कुराकर कभी सर झुकाना नहीं। […]

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ये जिन्दगी बहुत कुछ सिखाती है – Kavita – By Rehanika Kaushik (Kavitalay Member)

ये जिन्दगी बहुत कुछ सिखाती है गिरना तो कभी उठना सिखाती है। वैसे तो भीड़ बहुत है दुनिया में लेकिन चंद रिश्ते बेहद खास ये बनाती है। नजारों से भरी दुनिया खूबसूरत है लेकिन, लम्हा-ए-जरूरत में बदसूरत नजर आती है।   यहां हर शख्स सिर्फ अपने लिए जीता है   दूसरों की मुसीबत पर उसको […]

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तो क्या हुआ – Kavita – By Ajeet Rana (Kavitalay Member)

धीरज धरो हिम्मत करो दिन हैं विकट, तो क्या हुआ| साहस अदम्य, रग में तेरे; दुःख है निकट ,तो क्या हुआ|| विपदाएं आई कई झेली कई तू याद कर , तब भी अचल और अडिग था ढून्ढ लेता था, राहें नई आज फिर क्यूँ टूटता ? संकट नया तो क्या हुआ|| तू हौसला कर होकर […]

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जिम्मेदारी और जिम्मा – Kavita – By Arvind Maurya “अवि” (Kavitalay Member)

गर एक नज़र मेरी ओर देखने की जिम्मेदारी तुम ले लो,तो तुम्हें अपनी आँखों मेंछिपाने का जिम्मा मैं ले लूँ।गर अपने खुले केशों कोझटकने की जिम्मेदारी तुम ले लो,तो घनघोर घटाओं के घिरने का जिम्मा मैं ले लूँ।गर अपनी आँखों में काज़ल लगाने की जिम्मेदारी तुम ले लो,तो अमावस की कालीरात्रि लाने काजिम्मा मैं ले […]

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तेरे प्यार की छाँव – Kavita – by Sanchita Shukla (Kavitalay Member)

तेरे प्यार की छाँव की आस है मैं किसी धूप सा जलता फिरता हूँ दूर कर दिया तूने मुझे खुद की गर्मी से मैं किसी बर्फ़ सा हर रोज़ ही जमता हूँ बरस पाऊँ बारिश सा सावन में कभी मैं कही बादल सा आवारा फिरता हूँ सहलाती है ठंडी हवा गालों को तेरे मैं तूफ़ानों […]

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Kavita – कलंक – By Kirti Sofat Bharti (Kavitalay Member)

पूछना है आज सबसे है क्या कलंक  बिन-मां बाप की बेटी होना  क्या हुआ यदि नहीं है मां बाप,  पास है मेरे बाकी सब परिवार पूछन है आज सबसे। क्या कमी है मुझमें,  जो हर पल याद दिलाया जाता है  अनाथ शब्द को पूछना है आज  कसूर मेरा क्या है जो नजरें झुका मै चुपचाप […]