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ये जिन्दगी बहुत कुछ सिखाती है – Kavita – By Rehanika Kaushik (Kavitalay Member)

ये जिन्दगी बहुत कुछ सिखाती है गिरना तो कभी उठना सिखाती है। वैसे तो भीड़ बहुत है दुनिया में लेकिन चंद रिश्ते बेहद खास ये बनाती है। नजारों से भरी दुनिया खूबसूरत है लेकिन, लम्हा-ए-जरूरत में बदसूरत नजर आती है।   यहां हर शख्स सिर्फ अपने लिए जीता है   दूसरों की मुसीबत पर उसको […]

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Kavita – वो डर जाएगी – By Sanchita Shukla (Kavitalay Member)

समाज के बंधनों से  दुनिया की रिवायतों से  वो डर जाएगी  वो लड़ नही पाएगी। कमजोर करती वैचारिकी से छोटा करते विचारों से वो डर जाएगी  वो लड़ नही पाएगी।  कुरितियों की धूप से  असमानता की आँधी से  वो डर जाएगी  वो लड़ नही पाएगी। अगर निडर होकर समाज में आगे आएगी बंधनो को तोड़कर […]

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Kavita – जुदाई – By Inder (Kavitalay Member)

चार दिनों का ये इश्क़  हमे शजरा लगता है कुछ तो तेरी जिंदगी का  मुझसे गुज़रा गुज़रा लगता है चाहते तुझ से जुड़ी है पैहम फिर भी जाने क्यों जाना इस दुनिया में हमसे तू बिछड़ा बिछड़ा लगता ह ै तुझे मिला गया अब क्या नया नया कोई कल परसों से तू मुझसे कुछ उखडा […]

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Kavita – जिन्दगी – By Prem Srivastava (Kavitalay Member)

सोचा था सपनो को बहुत उँची उड़ान दूँगा इस छोर से उस छोर तक दुनीया छान दूंगा बचपन में छान देते थे जैसे सारा मुहल्ला सोचा वैसे ही जिन्दगी को एक मुकाम दूंगा। मासूम था वो बचपन जहाँ तारों के साये में सोते थे एक छोटे से खिलौने के लिए जिद्द पकड़ कर रोते थे […]