Kavita – वो डर जाएगी – By Sanchita Shukla (Kavitalay Member)

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समाज के बंधनों से 
दुनिया की रिवायतों से 
वो डर जाएगी 
वो लड़ नही पाएगी।

कमजोर करती वैचारिकी से
छोटा करते विचारों से
वो डर जाएगी 
वो लड़ नही पाएगी। 

कुरितियों की धूप से 
असमानता की आँधी से 
वो डर जाएगी 
वो लड़ नही पाएगी।

अगर निडर होकर समाज में आगे आएगी
बंधनो को तोड़कर निर्भया दिखलाएगी 
आँधी ओर धूप उसका कुछ नही कर पाएगी 
वो डर के नही जाएगी 
वो लड़कर जीत के दिखाएगी।।

--Sanchita Shukla

2 thoughts on “Kavita – वो डर जाएगी – By Sanchita Shukla (Kavitalay Member)

  1. पुरातन विचारों से लड़कर ही आज नारी जीवन के इस अहम मुक़ाम पर पहुँची है।आपने बहुत बढ़िया लिखा है।

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