नेह हमारा निर्मल निर्झर – Kavita – By Sumit Vijayvargiya (Kavitalay Member)

नेह हमारा निर्मल निर्झर, अविरल और अभिराम प्रिये,
बीत गए हो बरस भले ही,  अधरों पर है नाम प्रिये।

बेशक याद तुम्हें भी होगा, वो आंखों से बतियाना,
फूल गुलाबों के दे देकर, प्रणय दिलों तक पहुँचाना,
उन फूलों से महक रहे है, मेरे सुबह और शाम प्रिये।
बीत गए हो बरस भले ही, अधरों पर है नाम प्रिये।।
नेह हमारा निर्मल निर्झर, अविरल और अभिराम प्रिये।


एक तुम्हारे मुस्काने से, अपनी फिजाऐं बदल गयी,
जिनसे जमाना हार गया, वो तल्ख़ सदाएँ भी बदल गयी,
अक्स तुम्हारा देखे भर से, पलकों को आराम प्रिये।
बीत गए हो बरस भले ही, अधरों पर है नाम प्रिये।।
नेह हमारा निर्मल निर्झर, अविरल और अभिराम प्रिये।



उमर बिता दी तन्हा हमनें, महज तुम्हारे वादों पर,
दिल ने सीख लिया है जीना, सहज तुम्हारी यादों पर,
प्रीत तुम्हारी राधा जैसी, मन मेरा ब्रजधाम प्रिये।
बीत गए हो बरस भले ही अधरों पर है नाम प्रिये।।
नेह हमारा निर्मल निर्झर, अविरल और अभिराम प्रिये।
बीत गए हो बरस भले ही, अधरों पर है नाम प्रिये।।
-सुमित विजयवर्गीय

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