Kavita – जुदाई – By Inder (Kavitalay Member)

चार दिनों का ये इश्क़ 
हमे शजरा लगता है
कुछ तो तेरी जिंदगी का 
मुझसे गुज़रा गुज़रा लगता है

चाहते तुझ से जुड़ी है पैहम
फिर भी जाने क्यों जाना
इस दुनिया में हमसे तू
बिछड़ा बिछड़ा लगता ह

तुझे मिला गया अब
क्या नया नया कोई
कल परसों से तू मुझसे
कुछ उखडा उखड़ा लगता है

अब तुमसे मिलने की हम 
ख्वाहिश ही क्या करते
जब मेरा क़िरदार भी तुमको
बिगड़ा बिगड़ा लगता है।
--Inder

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