Kavita – कलंक – By Kirti Sofat Bharti (Kavitalay Member)

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पूछना है आज सबसे है क्या कलंक 
बिन-मां बाप की बेटी होना 
क्या हुआ यदि नहीं है मां बाप, 
पास है मेरे बाकी सब परिवार
पूछन है आज सबसे।

क्या कमी है मुझमें, 
जो हर पल याद दिलाया जाता है 
अनाथ शब्द को पूछना है आज 
कसूर मेरा क्या है जो नजरें झुका
मै चुपचाप चलना सिखुं
पूछना है आज सबसे।

गलती मेरी क्या है होता देख भेदभाव
चुप रहकर सहना सिखुं। नहीं
पूछना है आज सबसे।
बन गई हूँ  मां पर तर्क बिन 
मां बाप की बेटी का नहीं हुआ खत्म 
पूछना है आज सबसे।

लक्ष्य नहीं है मेरा, ठेस पहुंचाना 
किसी अपने के दिल को
पूछना है आज सबसे है क्या कलंक 
बिन मां बाप की बेटी होना||
--Kirti Sofat Bharti

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