अगर तुम मिलने आ जाओ – Kavita – Sumit Vijayvargiya (Kavitalay Member)

गिला सारा निकल जाएं, 
अगर तुम मिलने आ जाओ,
ये दिल फिर से बहक जाएं 
अगर तुम मिलने आ जाओ।

जहाँ में सब हमारे है ,
अगर रूठे हो तुम हमसे,
बगावत फिर से हो जाए,
अगर तुम मिलने आ जाओ।

गुलिस्तां फिर महक जाएं, 
अगर तुम मिलने आ जाओ,
दफ़न दरिया मचल जाएं, 
अगर तुम मिलने आ जाओ।

हजारों रंज दर्द ए गम 
दफ़न है मेरे सीने में,
जमानत इनको मिल जाएं 
अगर तुम मिलने आ जाओ।

यकीं उल्फ़त पे आ जाए, 
अगर तुम मिलने आ जाओ,
ये दिल हरक़त में आ जाए, 
अगर तुम मिलने आ जाओ।

तुम्हारे बिन हर इक जर्रे में, 
आलम तीरगी का है,
चरागा जश्न  हो जाए,
अगर तुम मिलने आ जाओ।

अश्क नायाब हो जाए, 
अगर तुम मिलने आ जाओ,
सनम आदाब हो जाए, 
अगर तुम मिलने आ जाओ।

खुदाया शुक्र है तेरा,  
अता की सुर्खियां मुझको,
मगर बदनाम हो जाएं, 
अगर तुम मिलने आ जाओ।

ग़ज़ल गुलफाम हो जाए, 
अगर तुम मिलने आ जाओ,
ये चर्चा आम हो जाए,
अगर तुम मिलने आ जाओ।

हर इक ख्वाहिश अधूरी है,
बिना उसकी इनायत के,
करम सरकार हो जाए,
अगर तुम मिलने आ जाओ
--Sumit Vijayvargiya

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