इल्ज़ाम वो, जिनकी कोई बुनियाद नहीं – Poem – By Gaurav Pareek “फागवी” (Kavitalay Member)

मुझपे हैं इल्ज़ाम वो, जिनकी कोई बुनियाद नहीं 
मामला है क्या, मुद्दा क्या है, कुछ भी तो याद नहीं| 

बेशक, अशरफियों की चमक ने मुगालते पाले हैं 
यकीन ख़ुद ओ' इल्म पे है, हम भी बरबाद नहीं| 

भले ही हूर हैं, बाग़ में चहकती बुलबुल हैं वो 
फरिश्ते, बेशक ना हों, हम भी सय्याद नहीं| 

हसरतें नदियाँ हैं उफनती, हक़ीक़तें समन्दर है 
कितना भी जोश ए मौज हो,साहिल से आज़ाद नहीं|

जिन्दगी पे ख़ुद से ज्यादा हक़ उन "ख़ुदा" का है 
नसीहत है मुफ्त की, तुमसे कोई फरियाद नहीं||

--गौरव पारीक "फागवी"

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