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मैं शून्य होना चाहती हूँ – Kavita – By Priyanka Katare ‘प्रिराज’ (Kavitalay Member)

सब विवशताओं से परे  हर धर्म को भी छोड़कर, स्वयं में खोना चाहती हूँ  मैं शून्य होना चाहती हूँ । हर भलाई से हो के इतर और हर बुराई छोड़कर, कुछ न ढोना चाहती हूँ   मैं शून्य होना चाहती हूँ। ना सुख की कोई चाह हो ना दुख से कोई आह हो, न हँसना न […]

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अगर तुम मिलने आ जाओ – Kavita – Sumit Vijayvargiya (Kavitalay Member)

गिला सारा निकल जाएं,  अगर तुम मिलने आ जाओ, ये दिल फिर से बहक जाएं  अगर तुम मिलने आ जाओ। जहाँ में सब हमारे है , अगर रूठे हो तुम हमसे, बगावत फिर से हो जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ। गुलिस्तां फिर महक जाएं,  अगर तुम मिलने आ जाओ, दफ़न दरिया मचल जाएं,  अगर […]

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नई बात हो – Kavita -By Sumit Vijayvargiya (Kavitalay Member)

प्रेम अक्सर रहा है विरह और व्यथा,  इक भरोसा मिले तो नई बात हो। चंद लम्हो के किस्से बहुत आम है, जो जनम भर चलो, तो नई बात हो। तुमसे चेहरे जहां में हजारों हसीं,  फिर भी मन बावरे ने तुम्हें ही चुना, ज़ख्म तो दिल को मिलते रहे अब तलक,  गर जो मरहम बनो […]

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उतारना है- Kavita – By Gaurav Pareek ‘फागवी’ (Kavitalay Member)

दिए तूने तोहफ़े में ज़ख्म,  तो एतराज कैसा,  थोड़ा सा कुरेदना है,  मलहम उतारना है।  ज़हर जो उतरा है,  तेरे जेहन में रफ़्ता रफ़्ता,  पीना है उसे बेखौफ,  तेरा वहम उतारना है। बुना गया है जिसे,  तबीयत से इर्द-गिर्द,  तिलिस्म ये तोड़ना है,  वो असर उतारना है।  कब तलक ढोता रहूँ,  जनाज़ा अपने कंधों पे,  […]