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अजीब दौर है – Hindi kavita by Seema jhunjhunwala (Kavitalay Member)

अजीब दौर हैं दिखावटो का दौर है। रिश्तो के नाम पर मिलावटो का दौर है। दिल की खुबसूरती से क्या लेना देना अभी तो नकली सजावटो का दौर है। हर कोई गुम है जाने किस तलाश में काम कम है, और ज्यादा थकावटो का दौर है । खत, कलम, स्याही, कहाँ हैं अब ऊँगलियों से […]

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नर हो नारी का सम्मान करो – Award Winning Hindi Kavita by Vandana Namdev

“नर हो नारी का सम्मान करो” नर हो, नारी का सम्मान करो। उनका ना कभी अपमान करो। हर पग के कांटे चुन लेगी, हर बात तुम्हारी सुन लेगी। तुम मानो या ना मानो ये, सपनों में तुम्हें ही बुन लेगी। नर हो तो फिर उत्थान करो, सब नारी का सम्मान करो। नारी ही जननी बनती […]

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कृति मै सर्वश्रेष्ठ हूंँ – Award Winning Hindi Kavita by Sarika Thakur

“कृति मै सर्वश्रेष्ठ हूंँ” क्यों करूंँ तेरी बराबरी, जब स्वयं ही मैं श्रेष्ठ हूंँ। उस विधाता के सृजन की, कृति मै सर्वश्रेष्ठ हूंँ ।। है तुझे अभिमान अपने जिस अस्तित्व का । वह भी एक उपहार है, मेरे ही कृतित्व का।। करके यूंँ अपमान, आज मेरे आंँचल का। बन रहा स्वयं ही अहंकारी, अपने ही […]

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औरत का सफ़र – Award Winning Hindi Kavita by Ramanand Thakur

“औरत का सफ़र” जन्म की पहली किलकारी से स्वर्ग की सीढ़ी तक अहम् किरदार निभाती है एक औरत की कहानी सबको सीख देके जाती है जन्म के वक्त माँ लक्ष्मी, पापा की परी तो माँ की लाडो बन आती है बहन की सच्ची सहेली तो भाई की जान बन जाती है कटता है हर वो […]

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युवा हूं मैं – Hindi Kavita – By Priyanka Katare

युवा दिवस के अवसर पर” युवा हूँ मैं ” कुछ कर जाने को आतुर हूँ मैं पल-पल होता व्याकुल हूँ, नव भारत का धुरा हूँ मैं, युवा हूँ मैं इक युवा हूँ मैं… हैं मेरे सपने बड़े- बड़े ना होंगे पूरे खड़े- खड़े, मुझे आगे- आगे बढ़ना है मुझे कठिन तपस्या करना है, कुछ इसके […]

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मां – A poem by Bharmal Garg

जब नेह नयन के दर्पण में। जब पावन पुण्य समर्पण में।। जब मात-पिता का वंदन हो। जब गुरुवर का अभिनन्दन हो।। जब मां बसे हों कण कण में। जब पिता बसे हों तन-मन में।। परिवार का सार्थक है। निज मन का सुखद है।। करुणा का दीप है। ज्ञान का प्रतीक है।। जीवन का आधार है। […]

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ओ मेरे मन के मीत – Kavita – By Om Neelamber (Kavitalay Member)

ओ मेरे मन के मीत सुनाओ दर्द भरे गीत टूट रहा है बांध मेरे सब्र का मिट रहा है चिन्ह यादों के कब्र का अतीत हो गया है मेरे खुशी का मेला तनहाई के पलों में नितांत हूं अकेला बोल,अपने जुबां को खोल अब और न सता,बता मेरी खता कहा है तू, क्या है तेरा […]

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नेह हमारा निर्मल निर्झर – Kavita – By Sumit Vijayvargiya (Kavitalay Member)

नेह हमारा निर्मल निर्झर, अविरल और अभिराम प्रिये, बीत गए हो बरस भले ही, अधरों पर है नाम प्रिये। बेशक याद तुम्हें भी होगा, वो आंखों से बतियाना, फूल गुलाबों के दे देकर, प्रणय दिलों तक पहुँचाना, उन फूलों से महक रहे है, मेरे सुबह और शाम प्रिये। बीत गए हो बरस भले ही, अधरों […]

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उम्रें गुजर गयी हैं अधूरी दास्तां के साथ – By Tushar Srivastava (Kavitalay Member)

उम्रें गुजर गयी हैं अधूरी दास्तां के साथ, मिलती है क्या कभी ये जमीं आसमां के साथ| नजरों में बस गया था बिना नज़र आये ही आहिस्ता हुए गुम फिर अपने जान-ए-जां के साथ| जाना किधर है और कहां मंजिल पता नहीं, चलते ही जा रहे हो फिर भी क्यूँ जहां के साथ| मुर्दा हैं […]

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जीवन भर घनघोर घटाएं,पग-पग पर संत्रास मिला – Kavita – By Sumit Vijayvargiya (Kavitalay Member)

जीवन भर घनघोर घटाएं, पग-पग पर संत्रास मिला। निज गौरव के अन्वेषण में, सर्वलोक उपहास मिला।। उमर हाथ से गई फिसल अब, आखों से आशा रूठी, तथाकथित गुरुता, गरिमा की माल भाल से जा छूटी, घोर तमिस्रा की कारा में, विधि है प्रबल प्रमाण मिला। क्षुद्र ग्रहों को मान मिला और चन्दा को अवमान मिला।। […]