Ghazal Kavita Zaki Tariq

भरे तो कैसे परिंदा भरे उड़ान – Hindi Kavita by Zaki Tariq

 भरे तो कैसे परिंदा भरे उड़ान कोई  नहीं है तीर से ख़ाली यहाँ कमान कोई  थीं आज़माइशें जितनी तमाम मुझ पे हुईं  न बच के जाएगा अब मुझ से इम्तिहान कोई  ये तोता मैना के क़िस्से बहुत पुराने हैं  हमारे अहद की अब छेड़ो दास्तान कोई  नए ज़माने की ऎसी कुछ आँधियाँ उट्ठीं  रहा सफ़ीने […]